Description
IBO-02 Hindi Medium Solved Assignment 2026 Available
भी प्रश्नों के उत्तर दीजिए
1.(क) अंतरराष्ट्रीय विपणन की अवधारणा और क्षेत्र की व्याख्या कीजिए। वैश्वीकरण, डिजिटलीकरण तथा विश्व बाजारों के बढ़ते एकीकरण के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय विपणन की बदलती भूमिका पर चर्चा कीजिए। अपने उत्तर को किसी भारतीय कंपनी के विदेशी बाजारों में विस्तार के उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
(ख) राजनीतिक, कानूनी, आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक तथा प्रौद्योगिकीय कारकों का अंतरराष्ट्रीय विपणन रणनीतियों के निर्माण एवं कार्यान्वयन पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए। उपयुक्त अंतरराष्ट्रीय व्यापार उदाहरणों द्वारा अपने उत्तर का समर्थन कीजिए।
2.(क) कंपनियों के लिए उपलब्ध प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रवेश रणनीतियों का वर्णन कीजिए। जोखिम, नियंत्रण, लागत तथा दीर्घकालीन रणनीतिक विचारों के संदर्भ में उपयुक्त प्रवेश माध्यम के चयन को प्रभावित करने वाले कारकों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के विदेशी बाजार में प्रवेश के उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
(ख) अंतरराष्ट्रीय विपणन अभिविन्यास के दृष्टिकोण के रूप में EPRG फ्रेमवर्क पर चर्चा कीजिए। यह स्पष्ट कीजिए कि EPRG अभिविन्यास संगठनात्मक दृष्टिकोण, विपणन रणनीति निर्माण तथा प्रबंधकीय निर्णय-निर्माण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।
3. निम्नलिखित पर संक्षिप्त नोट लिखिएः
(क) अंतरराष्ट्रीय विपणन अनुसंधान का महत्व एवं पद्धतिगत चुनौतियाँ
(ख) अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता व्यवहार के सांस्कृतिक निर्धारक
(ग) अंतरराष्ट्रीय सेवा विपणन एवं इसके रणनीतिक निहितार्थ
(घ) अंतरराष्ट्रीय बाजार खंडिकरण एवं स्थिति निर्धारण रणनीतियाँ
4. निम्नलिखित में अंतर कीजिए:
(क) घरेलू विपणन एवं अंतरराष्ट्रीय विपणन
(ख) वैश्विक बाजारों में उत्पाद मानकीकरण एवं उत्पाद अनुकूलन
(ग) प्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय वितरण चैनल एवं अप्रत्यक्ष अंतरराष्ट्रीय वितरण चैनल
(घ) अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लागत-आधारित मूल्य निर्धारण एवं मूल्य-आधारित मूल्य निर्धारण
5. निम्नलिखित कथनों पर टिप्पणी कीजिए:
(क) “अंतरराष्ट्रीय विपणन में सफलता केवल वैश्विक अवसरों की पहचान पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भिन्नताओं के प्रभावी प्रबंधन पर भी निर्भर करती है।”
(ख) “किसी फर्म की अंतरराष्ट्रीय मूल्य निर्धारण रणनीति वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा भी सकती है और बाजार प्रवेश में एक प्रमुख बाधा भी बन सकती है।”
(ग) “डिजिटल प्रौद्योगिकी में प्रगति ने अंतरराष्ट्रीय संवर्धन को देश-विशिष्ट गतिविधि से बदलकर एक वैश्चिक रूप से एकीकृत प्रक्रिया बना दिया है।”
(घ) “प्रभावी समन्वय एवं नियंत्रण प्रणालियों के अभाव में अंतरराष्ट्रीय विपणन संचालन अपनी रणनीतिक दिशा एवं दक्षता खो सकते हैं।”



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