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MHD-02 IGNOU Solved Assignment 2025-26

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MHD-02 IGNOU Solved Assignment 2025-26 Available

एम.एच.डी.-02 (आधुनिक हिंदी काव्य)

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Description

MHD-02 IGNOU Solved Assignment 2025-26 Available

सभी प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1 मैथिलीशरण गुप्त की कविता में राष्ट्रीयता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। सोदाहरण  स्पष्ट कीजिए।

2 साकेत लिखने की प्रेरणा गुप्त जी को कहाँ से प्राप्त हुई है? यह काव्य किस श्रेणी का है  इसका औचित्य को सिद्ध किजिए।

3 “निराला राग और विराग के कवि हैं इस कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

4 प्रसाद की काव्य भाषा का वैशिष्ट्य बताइए।

5 निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

(क) हा हा! भारत दुर्दशा न देखी जाई।

अंगरेज राज सुख साज सजे सब भारी। पै धन बिदेस चलि जात इहै अति ख्वारी। ताहू पै महंगी काल रोग विस्तारी।

दिन-दिन दूनो दुख ईसर देत हा हारी ।।

सबके ऊपर टिक्क्स की आफत आई।

हा! हा! भारत दुर्दशा न देखी जाई।

( ख) हे साधुओ सोये बहुत, अब ईश्वराराधन करो,

उपदेश द्वारा देश का कल्याण कुछ साघन करो। डूबे रहोगे और कब तक हाय। तुम अज्ञान में?

चाहो तुम्ही तो देश की काया पलट दी आन में।।

थे साधु तुलसीदास, नानक, रामदास समर्थ भी व्यवद्धत यही पद हो रहा है आज उनके अर्थ भी। पर ये न होकर भी यहाँ उपकार सबका कर रहे. स‌द्भाव उनके ग्रन्थ सबके मानसों में भर रहे

( ग) नील परिधान बीच सुकुमार

खुल रहा मृदुल अधखुला अंग खिला हो ज्यों बिजली का फूल मेघ-बन बीच गुलाबी रंग।

आह। वह मुख । पश्चिम के व्योम बीच जब घिरते हो धन श्याम अरुण रवि मंडल उनको भेद दिखाई देता हो छविधाम ।

(घ) धिक जीवन को जो पाता ही आया विरोध, धिक साधन, जिसके लिए सदा ही किया शोध ! जानकी ! हाय, उद्धार प्रिया का न हो सका। वह एक और मन रहा राम का जो न थका जो नहीं जानता दैन्य, नहीं जानता विनय कर गया भेद वह मायावरण प्राप्त कर जय, बुद्धि के दुर्ग पहुँचा, विद्युत्- गति हतचेतन राम में जगी स्मृति, हुए सज्जुल, पा भाव प्रमन।

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