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MHD-04 IGNOU Solved Assignment 2025-26 Available
खड-1
1. निम्नलिखित अवतरणों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए।
(क) युद्ध क्या गान है? रूद्र का शृंगीनाद, भैरवी का तांडव नृत्य और शस्त्रों का वाद्य मिलकर एक भैरव-संगीत की सृष्टि होती है। जीवन के अतिन दृश्य को जानते हुए, अपनी आंखों से देखना, जीवन-रहस्य के चरम सौंदर्य की नग्न और भयानक वास्तविकता का अनुभव केवल सच्चे वीर-हृदय को होता है, ध्वसमयी महामाया प्रकृक्ति का वह निरन्तर संगीत है। उसे सुनने के लिए हृदय में साहस और बल एकत्र करो। अत्याचार के श्मशान में ही मंगल का शिव का सत्य सुंदर संगीत का समारंभहोता है।
(ख) में दो बड़े पहियों के बीच लगा हुआ
एक छोटा निरर्षक शोगा-चक्र हूँ
जो बड़े पहियों के साथ घूमता है
वर रथ को आगे नहीं बढ़ाता
और न धरती ही छू पाता है।
और जिसके जीवन का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है
कि वह धुरी से उतर भी नहीं सकता।
(ग) धर्म, नीति, मर्यादा, यह सब है केवल आडम्बर नात्र,
मैंने यह बार-बार देखा था।
निर्णय के क्षण में विवेक और मर्यादा
व्यर्थ सिद्ध होते आये हैं सदा
हम सब के मन में कही एक अध गहवर है।
बर्बर पशु, अधा पशु वास बढी करता है. स्वामी जी हमारे विवेक का,
नैतिकता, मर्यादा, अनासक्ति, कृष्णार्पण
यह सब है अभी प्रवृत्तियों की पोशाक
जिनमें कटे कपड़ो की आँखें सिली रहती है
मुझको इस झूठे आङम्बर से नफरत थी
इसलिए स्वेच्छा से मैंने इन आँखों पर पट्टी चढ़ा रखी थी।
(घ) सौंच कहै ते पनही खावै।
झूठे बहु विधि पदबी पायें।
छलियन के एका के आगे।
लाख कहाँ एकहु नहि लागे ।।
भीतर होइ मलिन की कारो।
चाहिए बाहर रंग चटकारो।।
धर्म अधर्म एक दरसाई।
राजा करे सो न्याव सदाई।।
भीतर स्वाहा बाहर सादे।
राज करहि अगले अरू प्यादे ।।
अंधाधुंध मध्यौ सब देसा।
मानहुँ राजा रहत विदेसा ।।
गो द्विज श्रुति आदर नहि होई।
मानहुँ नृपति विधर्मी कोई।।
2. भारतेंदु ने अंधेर नगरी के माध्यम से तत्कालीन राज व्यवस्था के प्रति किस तरह का दृष्टिकोण व्यक्त किया है ? 10
3. स्कंदगुप्त चरित्र प्रधान नाटक है। इस कथन के सदर्भ में स्कंदगुप्त की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 10
4. हिंदी नाटक परंपरा में आधे-अधूरे का स्थान निर्धारित कीजिए।
5. ललित निबंध की दृष्टि से कुटज की विशेषताओं के विवेचन कीजिए।
6. निम्नलिखित विषयों पर टिप्पणी लिखिए।
(क) ‘लोन और प्रीति’ का प्रतिपाद्य
(ख) अंधायुग’ मिथकीय चेतना
(ग) ठुकरी बाम की चारित्रिक विशेषता
(घ) कलम का सिपाही शिल्पगत वैशिष्ट्य



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