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MHD-23 IGNOU Solved Assignment 2025-26 Available
1. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए:
(क) कदरि कम्भ दोइ चीर पहिराये। चाँद चलन अपुरुब घर लाये ।। औ समतोल दीख असि धारा। देख विमोड सरेंग पैतारा ।। देखि कम्भ मोर मन तस लागा। सरमैं धरउँ खाल कै नाँगा ।। चौदह चाँन देखि पाँ लागहि। पाप केत बरसहिं कर।। रूप पुतरि गढ़ दस नख लावा। तरुवहि रकत भू तर चलि ।।
(ख) ऐसा ध्यान घरी बनवारी, मन पवन दृढ सुषमन नारी।। से जप जपूँ जो बहुरि न जपना, सो तप तयूँ जो बहुरि न तपना ।। से गुरु करूँ जो बहुरि न करना, ऐसो माँ जो बहुरि न मरना ।। उल्टी गंग जमुन में लाऊँ, बिन ही जल मज्जन दै पाऊँ।। लोचन भरि-भरि बिम्ब निहारूँ, जेति विचारि न और विचारूँ।।
(13) बूझत स्थान कौन तू गोरी। कहाँ रहति, काकी है बेटी, देखी तहीं कहूँ ब्रज खोरी ।। काहे कौं हम ब्रज-तन आवर्ति, खेलति रहतिं आपनी पौरी।। सुनत रहतिं स्रवननि नंद-ढोटा, करत फिरत माखन-दधि चोरी।। तुम्हरौ कहा चोरि हम लैहैं, खेलन चलौ संग मिलि जोरी।। सूरदास प्रभु रसिक-सिरोमनि, बातनि भुख राधिका भोरी।।
(घ) धूर भरे अति शोभित स्याम जू तैसी बनी सिर सुन्दर चोटी। खेलत खात फिरै अंगना पग पैंजन बाजती. पीरी कछोटी।। व छवि को रसखानि बिलोकत बारत काम-कला निज कोटी। काग के भाग बड़े सजनी हरि हाथ सों लै गयो माखन रोटी ।।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभ500-500 शब्दों में दीजिए:
मध्ययुगीनता की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
(2) संत रविदास का जीवन परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके काव्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
(12) रसखान की प्रेमभावना का विवेचन कीजिए।
3. निम्नलिखित विषयों में से प्रत्येक पर लगभग 200 शब्दों में टिप्पणी लिखिए :
(ক) सूरदास की काव्य-भाषा
(m) ‘चंदायन’ की कथा
(12) सहज-शून्य



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