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BHDC-104 Hindi Medium Solved Assignments 2025-26 Available
1. निम्नलिखित पद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए:
क)कहता है कौन कि भाग्य ठगा है मेरा?
वह सुना हुआ भय दूर भगा है मेरा। कुछ करने में अब हाथ लगा है मेरा, वन में ही तो गार्हस्थ्य जगा है मेरा।
वह वधु जानकी बनी आज यह जाया, मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
ख)जिस निर्जन में सागर लहरी अम्बर के कानों में गहरी-निश्छल प्रेम-कथा कहती हो, तज कोलाहल की अवनी रे।
जहाँ साँझ-सी जीवन छाया, ढीले अपनी कोमल काया, नील नयन से दुलकाती हो, ताराओं की पाँति घनी रे।
ग)देखते देखा मुझे तो एक बार उस भवन की ओर देखा, छिन्नतार; देखकर कोई नहीं, देखा मुझे उस दृष्टि से जो मार खा रोयी नहीं, सजा सहज सितार,
सुनी मैंने वह नहीं जो थी सुनी झंकार एक क्षण के बाद वह काँपी सुघर, दुलक माथे से गिरे सीकर, लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा-‘मैं तोड़ती पत्थर ।’
घ)अन्य होंगे चरण हारे, और हैं जो लौटते, दे शूल को संकल्प सारे, दुखव्रती निर्माण उन्मद, यह अमरता. नापते पद, बाँध देंगे अंक-संसूति से तिमिर में स्वर्ण बेला!
खंड-ख
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 500 शब्दों में दीजिए:
2. भारतेन्दु के काव्य में निहित प्राचीन प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
3. द्विवेदी युगीन काव्य की साहित्यिक प्रवृत्तियों को रेखांकित कीजिए।
4. छायावाद की अन्र्त्तवस्तु पर विचार कीजिए।
5. जस्वशंकर प्रसाद की सौंदर्य चेतना पर प्रकाश डालिए।
खंड-ग
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में दीजिए:
6. भारतेन्दु के छंद विधान को उदाहरण सहित समझाइए।
7. रामनरेश त्रिपाठी के काव्य में अन्तर्निहित राष्ट्रीय भावना पर प्रकाश डालिए।
8. निराला की काव्य भाषा की विशेषताएं बताइए।
9. पंत की नारी दृष्टि को रेखांकित कीजिए।



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